प्रेम की चाह हर किसी को है चाहे फिर वो मनुष्य हो, देव हो, दैत्य हो, पशु पक्षी हो।

देवों और इंसानो के प्रेम को भावनात्मक रूप देखा जाता रहा है।

पर किसी दैत्य (शैतान) के प्रेम को हमेशा लालसा और हवस की दृष्टि से देखा गया है।

प्रेम पर वैसे तो सबका अधिकार है, किंतु शैतान को अपने प्रेम पाने के लिए अप्राकृतिक आधिपत्य जमाना पड़ता है,

किंतु प्रेम पाने की नियत स्वच्छ हो तो उससे बड़ा प्रेम और कुछ भी नहीं…
प्रेम की भावना तो वैसे शैतान और इंसान दोनो में एक की समान हैं….
शैतान अपनी बुराइयों के साथ साथ अच्छी नियत से प्रेम करता है तो वह प्रेम
“THE SATAN’S FoWL”
कहलाता है…

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